जाड़े के मौसम में कुक्कुट का रखरखाव कैसे करें

इतना निश्चित है कि घरेलू मुर्गियाँ घूम-घूमकर जितना भी आहार जुटाएं, वह उनके अंडा अथवा मांस उत्पादन हेतु पर्याप्त नहीं होता। यही कारण है कि घरेलू मुर्गियों के वजन में बढ़ोत्तरी फार्म मुर्गियों की उपेक्षा कम होती है। देसी मुर्गियों में एक किलो वजन, प्राप्त करने में लगभग 6 माह का समय लग जाता है। चूजों को ठंड, बरसात, कई प्रकार की बीमारियों, चील-कौओं, कुत्ते, भेड़ियों आदि से सुरक्षित न रख पाने के कारण ग्रामीण परिवेश में, चूजों में मृत्यु दर बहुत अधिक पाई जाती है।

यह एक सर्वविदित तथ्य है कि अधिकाँश गरीब परिवार मुर्गी पालन पर आंशिक निर्भरता रखते हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि प्रदेश की कुल 81 लाख कुक्कट संख्या में लगभग 30% की संख्या देसी घरेलू मुर्गियों की है। आमतौर पर प्रत्येक आदिवासी परिवार में 5-10 मुर्गियाँ पाली जाती हैं। देसी मुर्गियाँ वर्ष में 3 बार ही अंडे देती है। इस प्रकार प्रत्येक बार 10-12 अंडे देने पर वर्ष मने उनका औसत उत्पादन कुल 30-35 अंडे माना जा सकता है। इस उत्पादन का 10-15% हिस्सा अंडे के रूप में खाने के उपयोग में लाया जाता है तथा 85-90% हिस्सा चूजे उत्पन्न कर उन्हें मांस के लिए पाला जाता है। देसी मुर्गी का वृद्धि दर अत्यंत धीमी होती है, परन्तु फिर भी प्रदेश में देसी मुग्रियों की संख्या अधिक होने के कारण, प्रदेश का 20% अंडा उत्पादन एंव 40% मांस देसी मुर्गियों द्वारा प्राप्त किया जाता है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है अप्रत्यक्ष रूप से यह आदिवासी गरीब परिवारों के लिए नियमित आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

ग्रामीण परिवार बिना लागत एवं बहुत कम देखरेख कर अपने घरों की बाड़ी में कुक्कट पालन करते हैं। फलस्वरूप, कुक्कट पक्षियों का प्रमुख आहार घरेलू बचा-खुचा खाद्य पदार्थ, कीड़े-मकोड़े एवं जैविक खेद अवशेष होता है। इस तरह से स्थानीय अनुपयोगी वस्तुओं को देसी मुर्गियों अंडे एवं मांस में बदलने का काम करती हैं। इससे इन कुक्कुटों के मांस का स्वाद अच्छा एवं अधिक गुणात्मक होने से इनका बाजार मूल्य अधिक होता है। इन्हीं धनात्मक गुणों के काँ मांसाहारी एंव पारम्परिक प्राथमिकताओं के कारण स्थानीय आदिवासी अधिकतर रंगीन देसी मुर्गी पालते हैं। रंगीन मुर्गी परिवेश में रंगों की अनुकूलता के करण शिकारी जानवरों एवं परभक्षी पक्षियों का शिकार होने से बच जाती है।

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन करते समय कुछ विशेष ध्यान रखने की आवश्‍यकता होती है।अगर हम जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन से अधिक से अधिक लाभ कमाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित बातें ध्यान में अवश्‍य रखनी चाहिए।जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन के लिए चूजे लाने से पहले या बाद में निम्नलिखित बातें ध्यान में अवश्‍य रखनी चाहिए:

हालांकि बड़ी मुर्गियां गर्मी की अपेक्षा सर्दी आसानी से सह लेती हैं। बड़ी मुर्गियों के मामले में केवल उनको गर्मी के समय हीसुरक्षित रखने की सावधानी बरतना ही काफी होता है। लेकिन अगर हम मुर्गी व्यवसाय से अधिक फायदा लेना चाहते हैं, तो चूजे लाने से पहले या बाद में निम्नलिखित बातें ध्यान में अवश्य रखनी चाहिए।जाड़े के मौसम मुर्गीपालन करते समय चूजों को ठंड से बचाने के लिए गैस ब्रूडर, बांस के टोकने के ब्रूडर, चद्दर के ब्रूडर, पट्रोलियम गैस, सिगड़ी, कोयला, लकड़ी के गिट्टे, हीटर इत्यादी की तैयारी चूजे आने के पूर्व ही कर लेना चाहिए। जनवरी माह में अत्यधिक ठंड पड़ती है अत: इस माह में चूजा घर का तापमान ९५ डिग्री फेरनहाईट होना अतिआवश्‍यक है। फिर दूसरे सप्ताह से चौथे सप्ताह तक ५-५ डिग्री तापमान कम करते हुए ,ब्रूडर का तापमान उतना कर देना चाहिए की चूजें ठंढ से बचे रहें और उन्हें ठंढ ना लगे ।  सामान्यतः ब्रूडर का तापमान कम करते हुए ८० डिग्री फारेनहाइट तक कर देना चाहिए।

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन करते समय चूज़ों की डिलीवरी सुबह के समय कराएँ, शाम या रात को बिलकुल नहीं कराएँ क्योंकि शाम के समय ठण्ड बढती चली जाती है। शेड के परदे चूजों के आने के 24 घंटे पहले से ही ढक कर रखें।चूजों के आने के कम से कम २ से ४ घंटे पहले ब्रूडर चालू किया हुआ होना चाहिए।

पानी पहले से ही ब्रूडर के नीचे रखें, इससे पानी भी थोडा गर्म हो जायेगा। अगर ठण्ड ज्यादा हो तो ब्रूडर को कुछ समय के लिए पोलिथीन के छोटे गोल शेड से ढक कर, हवा निरोधी भी आप बना सकते हैं।

 जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन में चूजों को ठण्ड लगने से सर्दी-खांसी की बीमारी होने का डर रहता है इसलिए जाड़ें में मुर्गियों को अधिक से अधिक एमिनो पॉवर दें क्योंकि एमिनो पॉवर (Amino Power) में प्रोटीन्स की मात्रा काफी अधिक होती है ,जो की न केवल मुर्गियों को ठंढ के प्रकोप से बचाता है बल्कि उनका वजन बहुत ही तेजी से बढ़ाता है। जाड़ें में मुर्गियों को एमिनो पॉवर (Amino Power) पहले दिन से लेकर पंद्रहवें दिन तक अवश्य दें । एमिनो पॉवर (Amino Power) पंद्रहवें दिन के बाद भी दे सकतें है ,जितना अधिक एमिनो पॉवर (Amino Power) देंगें उतना ही अधिक मुर्गियों का वजन बढ़ेगा ,रोग प्रतिरोधी छमता बढ़ेगी और ठंढ से लड़ने की शक्ति मिलेगी। एमिनो पॉवर (Amino Power) ४६ तत्वों का एक अद्भुत दवा है,जिसमें मुख्यतः सभी प्रोटीन्स,विटामिन्स और मिनरल्स मिला कर बनाया गया है।

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन के लिए मुर्गी आवास का प्रबंधन:

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन करते समय मुर्गी आवास को गरम रखने के लिए हमे पहले से ही सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि जब तापमान १० डिग्री सेण्टीग्रेड से कम हो जाता है तब मुर्गीपालन के आवास में ओस की बूंद टपकती है इससे बचने के लिए मुर्गीपालकों को अच्छी ब्रूड़िग करना तो आवश्‍यक है ही ,साथ ही मुर्गी आवास के ऊपर प्लास्टिक ,बोरे, फट्टी आदी बिछा देना चाहिए एवं साइड के पर्दे मोटे बोरे और प्लास्टिक के लगाना चाहिए, ताकि वे ठंडी हवा के प्रभाव को रोक सकें। रात में जाली का लगभग २ फीट नीचे का हिस्सा पर्दों से ढक दें। इसमें खाली बोरी और प्लास्टिक आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे अंदर का तापमान बाहर की अपेक्षा ज्यादा रहेगा। साथ ही यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि मुर्गीघर में मुर्गियों की संख्या पूरी हो। जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन करते समय एक अंगीठी या स्टोव मुर्गीघर में जला दें।इस बात का ध्यान रखें की अंगीठी अंदर रखने से पहले इसका  धुऑं बाहर निकाल दें ।

इस प्रकार से दी गई गर्मी से न केवल मुर्गीयाँ आराम से रहती हैं बल्कि मुर्गीघर का वातावरण भी खुश्‍क और गर्म  बना रहता है। खासकर ठण्ड के मौसम में सुबह में मुर्गीघर के अन्दर कम से कम दो घंटों तक धूप का प्रवेश वांछनीय है। अत: मुर्गीघर का निर्माण इस बिन्दू को ध्यान में रखते हुए उसकी लंबाई पूर्व से पश्‍चिम दिशा की ओर होनी चाहिए।

जाड़ें में कम से कम ६ इंच की बिछाली मुर्गीघर के फर्श पर डालें जो की अच्छी गुणवत्ता की हो ,अच्छी गुणवत्ता की बिछाली मुर्गियों को फर्श के ठंढ से बचाता है और तापमान को नियंत्रित किये रहता है।

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन हेतु मुर्गीघर की सफाई :

जाड़े के मौसम आने से पहले ही पुराना बुरादा, पुराने बोरे, पुराना आहार एवं पुराने खराब पर्दे इत्यादि बदल देना चाहिए । वर्षा का पानी यदि मुर्गीघर के आसपास इक्क्ठा हो तो ऐसे पानी को निकाल देना चाहिए और उस जगह पर विराक्लीन (Viraclean) का छिड़काव कर देना चाहिए। मुर्गीघर के चारों तरफ उगी घास, झाड़, पेड़ आदि को नष्ट कर देना चाहिए। दाना गोदाम की सफाई करनी चाहिए एवं कॉपर सल्फेट युक्त चूने के घोल से पुताई कर देनी चाहिए ऐसा करने से फंगस का प्रवेश मुर्गीदाना गोदाम में रोका जा सकता है। कुंआ, दीवाल आदि की सफाई भी विराक्लीन (Viraclean) से कर लेना चाहिए। पुरे मुर्गीघर को विराक्लीन (Viraclean) नाम की दवा छिड़काव करनी चाहिए , इस दवा को मुर्गीघर में हर रोज छिड़काव करनी चाहिए और मुर्गी के खाने और पिने के वर्तनों को हर रोज विराक्लीन (Viraclean)  से धोने चाहिए , इस दवा के प्रयोग से किसी भी संक्रामक रोगों का खतरा नहीं रहता है और ये दवा काफी प्रभावकारी है

जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन में दाने एवं पानी की खपत :

शीतकालीन मौसम में मुर्गीदाना की खपत बढ़ जाती है यदि मुर्गीदाना की खपत बढ़ नही रही है तो इसका मतलब है कि मुर्गियों में किसी बीमारी का प्रकोप चल रहा है। जाड़े के मौसम में मुर्गीपालन करते समय मुर्गियों के पास मुर्गीदाना हर समय उपलब्ध रहना चाहिए।

शीतकालीन मौसम में पानी की खपत बहुत ही कम हो जाती है क्योंकि इस मौसम में पानी हमेशा ठंडा ही बना रहता है इसलिए मुर्गी इसे कम मात्रा में पी पाती हैं इस स्थिति से बचने के लिए मुर्गीयों को बार-बार शुद्ध और ताजा पानी देते रहना चाहिए। पानी को शुध्द और विषाणुरहित बनाने के लिए इसमें एक्वाक्योर (Aquacure) मिलाना चाहिए।

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