प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना

चंचल साहू (एम.एस. सी. कृषि अर्थशास्त्र विभाग) कामिनी ठाकुर एवं पायल व्यास
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय,रायपुर (छ.ग.)
देश में कृषि कार्य करने वाले या पशुपालन जैसे किसानों के लिए बहुत सी योजनायें आती रहती है, जिससे उनका जीवन सुधर सकें। लेकिन देश में जलीय क्षेत्र में कृषि करने वाले लोगों जैसे मछुआरों के लिए अब तक कोई ऐसी योजना नहीं बनी हुई है, जिससे जलीय जीवों एवं उत्पादों को भी बढ़ावा मिल सके, तो अब ऐसे लोगों को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योकि केन्द्रिय बजट 2019 में वित्त मंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण जी द्वारा मछली पालन करने वाले एवं जलीय क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए एक योजना को शुरू करने की घोषणा की गई थी, जिसका नाम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (pmssy) है।
पीएम मोदी ने इस योजना को 10 सितंबर 2020 को बिहार में वीडियों कॉन्फ्रेस के जरिए लॉन्च किया। प्रधानमंत्री किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाजार योजना और सूचना पोर्टल ई-गोपाला एप भी लॉच किये। यह योजना मछली उत्पादकों को नया इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक उपकरण और नये बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराएगी। इसके साथ खेती और दूसरे माध्यमों के जरिए अवसरों को भी बढ़ाया जाएगा।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना-
pmssy मत्स्य क्षेत्र पर केंद्रित एक सतत् विकास योजना है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में कार्यन्वित किया जाना है। pmssy के अंतर्गत 20,050 करोड़ रूपये का निवेश मत्स्य क्षेत्र में होने वाले है।
इसमें से लगभग 12,340 करोड़ रूपये का निवेश समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि में लाभार्थी केंद्रित गतिविधियों पर तथा 7,710 करोड़ रूपये का निवेश फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रस्तावित है।
इसे देश के 21 राज्यों में शुरू किया जा रहा है जहां अगले चार से पांच सालों में निवेश किया जाएगा, इनमें से 1700 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को लॉच किया गया।
लक्ष्य-
? वर्ष 2024-25 तक मत्स्य उत्पादन में अतिरिक्त 70 लाख टन की वृद्वि करना।
? वर्ष 2024-25 तक मत्स्य निर्यात से होने वाली आय को 1,00,000 करोड़ रूपये तक करना।
? मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय को दोगुनी करना।
? पैदावर के बाद होने वाले नुकसान को 20-25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करना।
? मत्स्य पालन क्षेत्र और सहायक गतिविधियों में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना।
उद्देश्य-
ऽ आवश्यकता अनुसार निवेश करते हुए मत्स्य समूहों और क्षेत्रों के निर्माण पर केंद्रित।
ऽ मुख्य रूप से रोजगार सृजन गतिविधियों जैसे समुद्री शैवाल और सजावटी मछली की खेती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
ऽ यह मछलियों की गुणवत्ता वाली प्रजातियों की नस्ल तैयार करने तथा उनकी विभिन्न प्रजातियॉ विकसित करने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढॉचे के विकास और विपण्न नेटवर्क आदि ध्यान केंद्रित करेगा।
ऽ नीली क्रांति योजना की उपलब्धियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई नए हस्तक्षेपों की परिकल्पना की गई है। जिसमें मछली पकडऩे के जहाजों का बीमा, मछली पकडऩे वाले जहाजों/नावों के उन्नयन हेतु सहायता, बायो-टॉयलेट्स, लवण/क्षारीय क्षेत्रों में जलीय कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि स्टार्ट-अप्स, इन्क्यूबेटर्स, एक्वाटिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क और उनकी सुविधाओं का विस्तार, ई-टेड्रिंग/विपण्न , मत्स्य प्रबंधन योजना आदि शामिल है।़
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लाभ एवं विशेषताएं-
* जलीय क्षेत्र को बढ़ावा- देश में सभी क्षेत्र के लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनायें लांच की जाती है, लेकिन जलीय क्षेत्र ऐसा हैं, जिसे अब तक बेहतर लाभ प्राप्त नहीं हो सका है। इस योजना के माध्यम से जलीय क्षेत्र को भी अन्य क्षेत्र की तरह समान लाभ प्राप्त होगा ताकि जलीय क्षेंत्र को भी बढ़ावा मिल सके।
* मछली पालन को प्रोत्साहन- इस योजना को मछली पालन को बढ़ावा दिये जाने के लिए भी शुरू किया गया है, क्योकि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिससे मछली के उत्पादन में भी वृद्वि होगी।
* मछुआरों तक ऋण की सुविधा- इस योजना के माध्यम से मछुआरा समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों के लिए ऋ ण की सुविधा आसान की जाएगी, ताकि जलीय क्षेत्रों में भी जलीय उत्पादों से संबंधित या अन्य को व्यवसाय करने में बढावा मिले।
* वित्तीय सहायता – पिछले साल मोदी सरकार द्वारा इसके लिए एक फण्ड का आबंटन किया गया था। जो कि 7522 करोड़ रूपये का था। इस फण्ड को मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर इुंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट फण्ड से राज्य सरकार, सहकारी समितियों, व्यक्तियों और साथ ही उद्यमियों को उचित दरों के आधार पर इस योजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
* बीमा कवरेज- इस योजना के माध्यम से सरकार किसानों एवं समाज के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं में मछली पालन एवं जलीय क्षेत्र में काम करने वाले मछुआरों को भी शामिल करना चाहती है, ताकि उन्हें भी दुर्घटना बीमा प्राप्त हो सके।
* कुल लक्ष्य- सरकार का सन् 2020 तक 15 मिलियन टन तक का मछलियों के उत्पादन टन तक का मछलियों के उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है, जिसे योजना के माध्यम से पूरा किया जावेगा।
* नये विभाग का निर्माण- इस योजना को प्रधानमंत्री मोदी जी ने “नीली क्रांति” कहा है, और योजना सफलतापूर्वक लागू हो इसके लिए मोदी सरकार द्वारा एक अलग विभाग का भी निर्माण किया गया है, जिसका नाम है “मात्स्यिकी विभाग”। इस विभाग को इस योजना के तहत ही बनाया जा रहा है।
* मछली निर्यात को दुगुना करना लक्ष्य- इसका लक्ष्य आने वाले तीन से चार सालों में मछली निर्यात को दोगुना करना है,इससे मत्स्य पालन के क्षेत्र में नई नौकरी के लाखों अवसर पैदा
* योजना में शामिल होने वाले कुछ मुख्य बिंदू- इस योजना में इस नये विभाग के अंतर्गत इस क्षेत्र में होने वाली कमियों को दूर करने का प्रयास, साथ ही इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, उत्पादन पैदावर, उत्पाद कह गुणवत्ता एवं प्रबंधन सभी को किस तरह से नियंत्रित किया जा सकता है यह सब चीजें भी शामिल होगी।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में शामिल होने वाले लोग-
* मछली पालन या अन्य जलीय जीवों की खेती करने वाले लोग – ऐसे लोग जो कि मछली पालन या फिर अन्य जलीय जीवों की भी खेती करते है,उन सभी को इस योजना में लाभ प्राप्त होगा।
* जलीय कृषि करने वाले लोग- ऐसे लोग जो जलीय कृषि का भी काम कर रहे हों, उन्हें भी इसके तहत लाभ प्राप्त हो सकता है।
* प्राकृतिक आपदा से पीढि़त लोग- ऐसे लोग जो कि किसी प्राकृतिक आपदा के कारण पीढि़त हो गए है, जिससे उन्हें कई सारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं, उन्हें भी इस योजना में शामिल किया जायेगा।
एक्वाटिक डिजीज रेफरल प्रयोगशाला-
प्रधानमंत्री मोदी ने सीतामढ़ी में मछली ब्रूड बैंक और किशनगंज में एक्वाटिक डिजीज रेफरल प्रयोगशाला की घोषणा की, इसके लिए च्डडैल् के तहत सहायता प्रदान की गई है।
ये सुविधाएॅ मत्स्य किसानों के लिये गुणवत्ता और सस्ती दर पर मत्स्य बीज की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करके मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगीं और मछलियों के रोग निदान के साथ-साथ पानी और मिट्टी की परीक्षण सुविधाओं की आवश्यकता को भी पूरा करेंगी।
ई-गोपाला एप- ई-गोपाला एप किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाजार और सूचना पोर्टल है। वर्तमान में देश में पशुधन का प्रबंधन करने वाले किसानों कि लिए कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं है,
* देश में पशुधन के सभी रूपों (वीर्य, भु्रण आदि) में रोग मुक्त जर्मप्लाज्म खरीदना और बेचना
* गुणवत्ता प्रजनन सेवाओं की उपलब्धता (कृत्रिम गर्भधान, पशुु चिकित्सा, प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि) और पशु पोषण के लिए किसानों का मार्गदर्शन करना,
* उपयुक्त आयुर्वेदिक दवा/ एथनो पशु चिकित्सा का उपयोग करने वाले जानवरों का उपचार आदि की जानकारी देना
* पशु किसानों को अलर्ट भेजना (टीकाकरण, गर्भावस्था के निदान आदि के लिए नियत तारीख पर)
* किसानों को क्षेत्र में विभिन्न सरकारी योजनाओं और अभियानों के बारे में सूचित करें।
ई-गोपाला एप इन सभी पहलुओं पर किसानों को समाधान प्रदान करेगा।

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